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Patna High Court: न्यायिक अकादमी के काम में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, 30 नवंबर तक पूरा होगा निर्माण और सौंदर्यीकरण

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | पटना हाईकोर्ट ने बिहार न्यायिक अकादमी से जुड़े निर्माण, सुरक्षा और सौंदर्यीकरण कार्यों में देरी पर नाराजगी जताई। अधिकारियों ने 30 नवंबर तक काम पूरा करने का भरोसा दिया।

12 सितंबर, Alam Ki Khabar। बिहार न्यायिक अकादमी से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट ने निर्माण, सुरक्षा और परिसर के सौंदर्यीकरण से जुड़े कार्यों में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। अदालत के रुख के बाद राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी कोर्ट के सामने पेश हुए और सभी संबंधित काम निर्धारित समय में पूरा कराने का भरोसा दिया।

वरिष्ठ अधिकारियों की कोर्ट में मौजूदगी

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुधीर सिंह और न्यायमूर्ति राजेश कुमार वर्मा की खंडपीठ के सामने पर्यावरण एवं वन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर, पथ निर्माण सचिव पंकज कुमार पाल और नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पहले दिए गए आदेशों के अनुपालन में देरी को लेकर सवाल उठाए। पीठ ने पूछा कि न्यायिक अकादमी जैसे महत्वपूर्ण संस्थान की सुरक्षा और आसपास के क्षेत्र के विकास से जुड़े काम में इतनी देरी क्यों हो रही है।

30 नवंबर तक काम पूरा करने का आश्वासन

सरकार की ओर से अदालत को विभिन्न कार्यों की समय-सीमा की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि 30 नवंबर 2026 तक बाउंड्री वॉल, महात्मा गांधी सेतु के नीचे के क्षेत्र का सौंदर्यीकरण, बाड़ लगाने और वृक्षारोपण समेत संबंधित कार्य पूरे कर लिए जाएंगे।

अदालत ने यह स्पष्ट किया कि तय समय-सीमा के अनुसार काम पूरा होना चाहिए।

याचिकाकर्ता के वकील करेंगे काम की निगरानी

कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता पीयूष लाल को कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी दी है। यदि काम के दौरान किसी तरह की बाधा आती है या तय समय के अनुसार कार्य आगे नहीं बढ़ता है तो अधिवक्ता को अदालत का रुख करने की अनुमति दी गई है।

न्यायिक अकादमी के निदेशक को संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर काम समय पर पूरा कराने का निर्देश दिया गया है।

अतिक्रमण और अवैध निर्माण का मामला भी उठा

मामले की पिछली सुनवाई में न्यायिक अकादमी के आसपास अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माण का मुद्दा भी अदालत के सामने आया था। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से इस संबंध में की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी।

नगर विकास विभाग को मामले में पक्षकार बनाते हुए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश भी दिया गया था।

रिकॉर्ड के बिना दलील पर कोर्ट ने जताई आपत्ति

एक दिन पहले हुई सुनवाई में सरकारी पक्ष की ओर से रिकॉर्ड के बिना मौखिक दलील दिए जाने पर भी अदालत ने नाराजगी जताई थी।

एएजी-3 पीके वर्मा के हलफनामे में किए गए एक दावे के संबंध में जब अदालत ने संबंधित दस्तावेज की जानकारी मांगी तो रिकॉर्ड में वह दस्तावेज नहीं मिला। इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल मौखिक दलीलों के आधार पर अदालत मामले में आगे नहीं बढ़ सकती।

इसके बाद संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी।

अब समय-सीमा पर रहेगी नजर

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद संबंधित विभागों ने काम पूरा करने की समय-सीमा अदालत के सामने रख दी है। अब न्यायिक अकादमी की सुरक्षा, बाउंड्री वॉल, सौंदर्यीकरण और अन्य विकास कार्यों की प्रगति पर नजर रहेगी।

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